नकदी का संकट: सब्जियों के दाम आसमान से जमीन पर गिरे

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पलवल भाई साहब पहले हर रोज दो हजार की आराम से बिक्री हो जाती थी, लेकिन अब एक हजार की भी नहीं हो पा रही है। अब शादियां चल रही हैं, लेकिन बिक्री बढ़ने की बजाय बहुत ज्यादा घट गई है। कई बार तो जब सब्जी खराब होने का डर होता है तो उसे खरीदे हुए भाव से भी कम में बेचना पड़ता है। कमाई तो अब नाम की रह गई है। ग्राहक अब भी पुराने नोटों को दिखाते हैं, जिन्हें न तो आढ़ती लेता है और न ही बाजार में कोई चलाता है। इसलिए जो ग्राहक खुल्ले पैसे लेकर आता है, उसे ही सब्जी देते हैं।
पलवल सब्जी मंडी में यह दर्द नंदे राम के अलावा हर दुकानदार के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। रिजर्व बैंक द्वारा 500 और 1000 रुपये के नोट बंद किए जाने के बाद से सब्जी मंडी में ग्राहक नाम के ही नजर आ रहे हैं। पुराने नोट बंद होने और नए और खुल्ले नोटों का टोटा बेशक छोटे दुकानदार और आढ़तियों को परेशान कर रहा है, पंरतु दाम कम होने से ग्राहकों के लिए खुशी की बात है। नए नोटों के चक्कर में बिक्री घटकर आधी रह गई और सब्जियों के दाम आसमान से जमीन पर आ गिरे हैं। शादियों के सीजन में भी दुकानदार मंडी में ग्राहकों की बाट टोहते नजर आते हैं। जैसे ही कोई ग्राहक उनके पास आता है, सब्जियों के खराब होने के डर से दुकानदार उसे कम कीमत पर भी सब्जी बेचने को तैयार हो जाते हैं। नोट बंद होने के बाद से भाव में गिरावट( रुपये प्रतिकिलो)
सब्जी पहले अब भाव
आलू 20 12
गोभी 60 5
मूली 20 5
हरी मिर्च80 10
घीया 30 5
धनिया 150 20
गाजर 20 10
शकलकंदी 125 80
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पुराने नोट बंद होने और नए नोट न मिलने से बिक्री आधी रह गई है। बहुत कम ग्राहक मंडी आ रहे हैं।
– नंदे राम।
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ग्राहक अब भी पुराने नोट दिखाते हैं, लेकिन उन्हें न तो आढ़ती लेता है और न ही बाजार में कोई चलाता है।
– गौरव।
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कई बार तो जब बिक्री न होने से सब्जी खराब होने लगती है तो उसे खरीदे गए मूल्य से भी सस्ते में बेचना पड़ता है।
– राजकुमार।
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शादियों का सीजन होने के बावजूद बिक्री बढ़ने की बजाय घटकर आधी रह गई है, लेकिन हम सरकार के फैसले से खुश हैं।
– मनोज।
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ग्राहक पुराने नोट दिखाते हैं और बैंकों में भीड़ के कारण नए व खुल्ले नोट न मिल पाने का कारण बताते हैं, लेकिन कैसे ले लें।
– नरेश कुमार।
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सरकार का निर्णय बहुत बड़ा और जनहित में हैं। हमें बेशक नुकसान हो रहा है, लेकिन हम सरकार के साथ हैं और दुखी नहीं हैं।
– ओमप्रकाश।
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सब्जी लाने वाले किसान पुराने नोट नहीं लेते हैं और ग्राहक पुराने नोट दिखाते हैं। इस कारण से सब्जी की बिक्री आधी रह गई है।
– कपिल, आढ़ती।

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