पवित्रता की मिसाल पेश कर रहा हैदराबाद

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Faridabad News : जमानों से कोमलता,सादगी और पवित्रता की निशानी रहा मोती अपनी खूबसूरती के चलते हरियाणा के सूरजकुण्ड में भी अपनी खुशबू को बिखेर रहा है। महिलाओं को सदियों से अपनी ओर आकर्षित करने वाला मोती मेले मे भी पीछे नहीं है। सूरजकुंड मेंले में हैदराबाद के मोतियों का जलवा खूब चल रहा है। महिलाएं मोती से बने गहनों और सजावट के सामान को दिल खोल कर निहारती हैं और जरूरत के हिसाब से ले भी रही हैं। इसके साथ-साथ महिलाएं सिप से बनी वस्तुएं भी खरीद रही हैं।

इसके प्रति महिलाओं का लगाव आज की बात नहीं हैं। यह राजा महाराजाओं के घरानों और खासकर उनकी महारानियों की शान-ओ-शौकत में हमेशा से ही चार चांद लगाता रहा है। मोती का संबंध चांद से माना जाता है। प्राचीनकाल से ही यह सुंदरता को निखारने और पवित्रता की निशानी माना जाता रहा है। कहते हैं कि मोती को पहनने से आत्मविश्वास की भी वृद्धि होती है। मेले में सफेद से लेकर हरे और हल्के गुलाबी रंग के मोतियों से बने कान के झुमके,हार इत्यादि बेचे जा रहे हैं। समुंद्र से निकलने वाले मोती का अपने आप में ही आकर्षण रहा है। हालांकि आज के समय मेें इसकी बढती हुई मांग को देखकर कई देशों में इसकी खेती भी की जाने लगी है।

मेंले में स्टाल लगाने वाले राजकुमार अपने चाचा उततम के साथ पहली बार आए हैं। उन्होंने बताया कि वे प० बंगाल के दीघा सी बीच नामक स्थान से ताल्लुक रखते हैं। इस काम को उनके पूर्वज करते आए हैं। यह उनका खानदानी काम है। वे समुन्द्र से निकली हुई सिप और मोतियों को औजारों के साथ तराशते हैं और उनको तरह तरह के आकार देकर बाजार में बेचने के लिए उतारते हैं। उन्होंने बताया कि इनसे विभिन्न तरह की ज्वैलरी भी तैयार की जाती है। इसी तरह सिप के बॉऊल, चम्मच, नैक लेस इत्यादि सामान की भी बहुत मांग है। यहां मेंले में उनके पास 150 से लेकर 1500 तक का समान है। वैसे मोती और सिप से बना सामान लाखों रूपये तक आता है। सूरजकुंड मेले में उन्हें अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। अब तक करीब डेढ लाख रूपये तक का सामान बेचा जा चुका है।

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