सूरजकुण्ड मेला कला, संस्कृति व विश्व एकता का मेला: प्रो. सोलंकी

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Faridabad News : हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि हरियाणा के जिला फरीदाबाद के सूरजकुण्ड में लगाए जाने वाला सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला केवल शिल्प मेला ही नहीं हैं, बल्कि यह मेला कला, संस्कृति, विरासत और विश्व की एकता का मेला हैं। राज्यपाल ने यह बात सूरजकुण्ड में हरियाणा स्वर्ण जयंती 31 वें सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही। हरियाणा राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने हरियाणा स्वर्ण जंयती 31वें सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले के समापन की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने मूल, संस्कृति, धरोहर, विरासत को नहीं पहचानता वह अपनी जमीन से से दूर हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस मेले ने भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर विश्व भर में हरियाणा की पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मना रहा है। उन्होंने कहा कि यह मेला विश्व को संदेश देता हैं परंतु हरियाणा के कुरूक्षेत्र में मनाई जानी वाली गीता जयंती भी विश्व को संदेश देती हैं और इस बार तो गीता जंयती को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया गया है जिसमें देशभर के 474 जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और विदेशों से आए हुए लोगों ने भी भाग लिया।

उन्होंने कहा कि सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला में पिछली बार 13 देशों ने भाग लिया था और इस बार यह संख्या बढकर 22 देश हो गई है इससे पता चलता हैं कि यह मेला दिनों दिन प्रचलित हो रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली बार 810 स्टालों को लगाया गया था और इस बार 1000 से अधिक स्टालों को लगाया गया है और 16 एकड भूमि भी जोडी गई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा पूरे विश्व को संस्कृति के माध्यम से जीने का तरीका सिखाता हैं जो स्थाई और शाषवत हैं। उन्होंने हरियाणा सरकार और पर्यटन विभाग के अधिकारियां द्वारा किए गए प्रयासों की प्रशंसा की। राज्यपाल ने कहा कि हरियाणा सरकार ने निर्णय लिया है कि अगला मेला फरवरी माह के पहले शुक्रवार को शुरू करके फरवरी माह के तीसरे रविवार को समाप्त किया जाएगा जिससे हरियाणा के नाम को और अधिक ऊंचाई मिलेगी। उन्होंने आए हुए सभी कलाकारों और शिल्पियों को बधाई दी और विशेष तौर पर थीम राज्य झारखण्ड की राज्यपाल और उनके राज्य से आए हुए कलाकारों व शिल्पियों को बधाई दी।

इससे पूर्व झारखण्ड की राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने जोहार झारखण्ड कहते हुए कहा कि उन्हें अति प्रसन्न्ता है कि झारखण्ड को सूरजकुण्ड मेले में थीम राज्य के रुप में सम्मिलत किया गया। उन्होंने कहा कि इससे जहां झारखण्ड के पर्यटन को नई उचाईया मिलेगी वहीं झारखण्ड को एक विशिष्ट पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि इस मेले में भारत के विविध कलाओं व शिल्प की अदभुत झलक देखने को मिलती है, जिसके लिए भारत सरकार, हरियाणा सरकार और झारखण्ड सरकार को वे बधाई देती हैं। उन्हेांने कहा कि झारखण्ड अपने विविध कलाओं और संस्कृति के लिए जाना जाता हैं और वहां के प्रत्येक घर में वादय यंत्र पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस मेले के माध्यम से जहां देश के विभिन्न राज्यों की कलाओं व शिल्प को देखने को मिला वहीं विदेशों से आए कलाकारेां ने भी अपनी अपनी कला व शिल्प की छटा बिखेरी जिससे कलाकारों व शिल्पियों को कला का आदान प्रदान करने का एक प्रकार से यह मेला मंच बना। उन्होंने कहा कि इस मेले में वसुधवे कुटुम्ब का अदभुत मेल देखने को मिला है।

उन्होंने कहा कि भारत के कलाकारों व शिल्पियों ने अपनी इस धरोहर को संजोए रखा हैं और पीढी दर पीढी इसे पोषित किया हैं। उन्हेांने कहा कि शिल्पकार वह है जो एक बेजान वस्तु में जान डाल देता है। उन्होंने कहा कि यदि शिल्पकार के लिए अच्छा बाजार होगा तो उसकी आर्थिक दशा भी अच्छी होगी जिससे अर्थ व्यवस्था में योगदान मिलेगा। उन्होंने कहा कि सबकी उन्नति में हीं देश की उन्नति हैं।
इस अवसर पर हरियाणा के पर्यटन मंत्री राम बिलास शर्मा ने कहा कि इस मेले की शुरूआत पूर्व आईएएस अधिकारी एस के मिश्रा ने की थी, जिन्हें उन्होंने स्वयं मंच पर बुलाकर शॉल पहनाकर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि वैसे तो आज विदाई का दिन हैं परंतु यह विदाई दोबारा मिलने के लिए हैं। उन्होंने कहा कि इस मेले में 12.50 लाख से ज्यादा लोगों ने भ्रमण किया जिसके लिए वे पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, मेला प्राधिकारण, पर्यटन विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने थीम राज्य झारखण्ड द्वारा मेला परिसर में स्थापित की गई बिरसा मुंडा की मूर्ति और गेट निर्माण की भी प्रशंसा की।
इससे पूर्व, हरियाणा पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वी एस कुण्डू, झारखण्ड सरकार के पर्यटन विभाग के सचिव राहुल शर्मा, हरियाणा पर्यटन विभाग के प्रबंध निदेशक समीरपाल सरो ने मेला से जुडी जानकारियां दी और लोगों को संबोधित किया।
इस मौके पर आए हुए अतिथियों के सम्मुख हरियाणा सांस्कृतिक कार्य विभाग के कलाकारों, झारखण्ड के कलाकारों और भागीदार देश मिस्र के कलाकारों द्वारा बेहतरीन नृत्य व रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिस पर अतिथियों व उपस्थित लोगों ने तालियां बजाकर कलाकारों की हौंसला अफजाई की। इस अवसर पर बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन काल पर एक लाईट एंड साऊंड कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। इस मौके पर हरियाणा पर्यटन विभाग की मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा, पर्यटन विभाग के चेयरमैन जगदीश चौपडा, चेयरमैन अजय गौड, मेयर सुमन बाला, भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा, महामंत्री संदीप जोशी, वरिष्ठ भाजपा नेता बी बी भारद्वाज व अनिता शर्मा भी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने शिल्पियों को किया सम्मानित
राज्यपाल ने परम्परागत श्रेणी में उतर प्रदेश के मोहम्मद मतलुब को बुड कार्विंग के लिए पुरस्कृत किया, जिनका स्टाल नंबर- 1221 हैं, इन्हें 11 हजार रुपए की राशि व एक स्मृति चिन्ह तथा शॉल देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने कलामणि श्रेणी में ओडिसा के निरंजन मोहराना को पटाचित्रा कला के लिए पुरस्कृत किया जिनका स्टाल नंबर-1040 हैं। राजस्थान के लक्ष्मी लाल कुम्हार को टेरोकोटा के लिए पुरस्कृत किया जिनका स्टाल नंबर-1224 हैं, छतीसगढ के भुवनेश्वर को साडी डे्रस मैटिरियल के लिए पुरस्कृत किया जिनका स्टाल नंबर-762 हैं। स्टाल नंबर-1022 छतीसगढ के ढाणीराम झोरक को ढोकरा आर्ट, स्टाल नंबर-1216 राजस्थान के रुप किशोर सोनी को सिल्वर एन्ग्रेविंग, स्टाल नंबर-1103 कर्नाटका के एस. मनोहर को लैदर पपेट तथा स्टाल नंबर-1214 उतर प्रदेश के गोदावरी सिंह को बुडन खिलौनों के लिए कलामणि पुरस्कार से पुरस्कृत किया। इन्हें 11 हजार रुपए की राशि व एक स्मृति चिन्ह तथा शॉल देकर सम्मानित किया गया।

प्रो. सोलंकी ने कलानिधि श्रेणी में पांच पुरस्कार दिए जिनमें स्टाल नंबर-162 झारखण्ड के मुंगल महाली को बैंबू के लिए, स्टाल नंबर-1182 वेस्ट बंगाल के कोहोकोन नांदी को झमदानी साडी के लिए, स्टाल नंबर-एफसी 14 सिरिया के हलालकीनेया को बुड तथा टैकसटाइल के लिए, स्टाल नंबर- एफसी 24 नेपाल के तेज नारायण राम को शॉल के लिए तथा स्टाल नंबर-1229 तेलंगाना के मोहम्मद गुलाम को कॉटन दरी के लिए पुरस्कृत किया गया। इन्हें 5100 रुपए की राशि व एक स्मृति चिन्ह तथा शॉल देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कलाश्री श्रेणी में चार शिल्पियों को पुरस्कार दिए जिनमें स्टाल नंबर-151 झारखण्ड की खोरी देवी को मधुबनी के लिए, स्टाल नंबर-988 हरियाणा की ललिता चौधरी को खादी के लिए, स्टाल नंबर-150 झारखण्ड के जोगेश्वर मिस्त्री को मास्क के लिए तथा स्टाल नंबर-922 हरियाणा की निशा को स्टोन डस्ट पेंटिंग के लिए पुरस्कृत किया गया। इन्हें 2100 रुपए की राशि व एक स्मृति चिन्ह तथा शॉल देकर सम्मानित किया गया।

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