कवित्री सलोनी चावला द्वारा लिखित कविता -सुहागनों के त्यौहार “करवाचौथ ” पर औरतों की खिलखिलाती मनोदशा और चाँद का इतराना 

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फरीदाबाद की कवित्री सलोनी चावला ने सुहागनों के त्यौहार

“करवाचौथ ” पर औरतों की खिलखिलाती मनोदशा और चाँद

किस तरह इतराता है , स्थिति को शब्दों में बेहद खूबसूरती से

बयाँ किया है। सलोनी चावला जहां उच्च कवित्री हैं , वहीं ऊपर
वाले ने उन्हें बेहद मधुर स्वर और कंठ दिया है। वह गाती भी बेहद
सुरीला हैं।  आज उन्होंने करवाचौथ पर एक गीत भी गया है , जो
बेहद सरहाया जा रहा है। फिलहाल उनकी पंक्तियाँ आपके समक्ष
हैं :-
करवा चौथ का चाँद
                          सलोनी चावला
आज की रैना देखो चांद कैसे इतराने लगा,
आया करवा चौथ तो खुद से बतियाने लगा-
“एक बरस के बाद फिर वह रात है आई,
365 रातों में, यह रात मुझको है भाई।
सुहाग की लंबी उम्र, हर सुहागन मांगती,
पर सुहाग से पहले करती मेरी आरती।
वैसे तो लाखों शायर हैं दीवाने मेरे,
पर यूँ छत पर रोज़ कौन लगाता है फेरे।
शाम कटती है कर कर के मेरा इंतजार,
व्रत टूटता है जब हो जाता मेरा दीदार।
इस त्यौहार से मैंने कितनी इज्ज़त है कमाई,
मेरे कारण कितने पतियों ने लंबी उम्र है पाई।”
आज की रैना देखो चांद कैसे इतराने लगा,
आया करवाचौथ तो खूब मुस्काने लगा।

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