किसान आंदोलन हरियाणा सरकार के लिए बना सर दर्द , सी एम् आवास का किया घेराव , खाप पंचायतों ने सरकार गिराने की बनाई रणनीति

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चंडीगढ़ , 2  दिसंबर । किसान आंदोलन केंद्र सरकार के साथ साथ हरियाणा सरकार के लिए भी सिरदर्द  बन गया है।  आज बुधवार को पंजाब के युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल के निवास का घेराव किया तो खाप पंचायतों ने गैर भाजपा विधायकों पर दबाव बना कर उनसे भाजपा सरकार से समर्थन वापसी का निर्णय लेने का ऐलान किया है।  खाप के फैसले के साथ खड़े चरखी दादरी के विधायक सोमबीर सांगवान ने इसकी पहल करते हुए पहले सरकार का पशुधन बोर्ड का चेयरमैन पद छोड़ा और फिर सरकार से समर्थन वापसी का ऐलान कर दिया। दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के मसले को लेकर महम के निर्दलीय विधायक पहले ही कई महीने से सरकार से नाराज चल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर 6 निर्दलीय विधायकों ने सरकार को समर्थन दिया हुआ है।

आज चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आवास का घेराव करने जा रहे पंजाब यूथ कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।पंजाब यूथ कांग्रेस के प्रधान वरिंदर ढिल्लों समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शनकारी किसान आंदोलन में हिस्सा ले रहे पंजाब के किसानों को हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा खालिस्तानी कहे जाने का विरोध कर रहे थे। इसी के विरोध में बुधवार को पंजाब यूथ कांग्रेस ने मनोहर लाल के चंडीगढ़ स्थित आवास के घेराव का एलान किया था।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल करते हुए उन्हें रोकने की भरसक कोशिश की। पुलिस व् प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के उपरान्त प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता बेकाबू हो गए और प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर सेक्टर 3 में हरियाणा निवास की ओर बढ़े लेकिन कार्यकर्ताओं पर सेक्टर 2-3 के चौक पर फिर से वाॅटर कैनन बरसाए गए। आखिरकार पुलिस इन सभी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर सेक्टर 3 पुलिस स्टेशन ले गई।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसान चुपचाप दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए, बैरिकेडिंग की, वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, आंसू गैस के गोले फेंके, सड़कें तक खोद दी, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था।

केंद्र की भाजपा सरकार के लाए गए नए कृषि कानूनों को लेकर विरोध कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। अब सूबे की खाप पंचायतें अब किसान आंदोलन में कूद गई हैं। इसी के चलते अब सरकार में सहयोगी बने निर्दलीय विधायकों पर समर्थन वापसी के लिए दबाव बनाने का फैसला किया गया है। साथ ही कहा है कि जिसने समर्थन वापस नहीं लिया, उसकी एंट्री बैन कर दी जाएगी।

हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से 40 सीटें भाजपा की हैं। 10 डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला की पार्टी JJP की हैं। 31 कांग्रेस की तो एक सीट हरियाणा लोक भलाई पार्टी को मिली थी और एक इनेलो को। इसके अलावा 8 विधायक निर्दलीय हैं। JJP और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से हरियाणा के खट्टर सरकार चल रही है।

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