किसान आंदोलन : आज केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच 9वें दौर की बैठक भी रही बेनतीजा , किसान नेताओं ने दिखाया तल्ख़ रुच 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

नई दिल्ली , 8  जनवरी। सरकार के साथ किसानों की 9वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। 44 दिन से दिल्ली के दरवाजे पर आंदोलन कर रहे किसानों ने बैठक में तल्ख रुख अपनाया। बैठक में किसान नेताओं ने पोस्टर भी लगाए, जिन पर गुरुमुखी में लिखा था- मरेंगे या जीतेंगे। बैठक के बाद भी किसानों के तल्ख तेवर कायम रहे। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी माना, ‘50% मुद्दों पर मामला अटका हुआ है। इसलिए अगली बैठक 15 जनवरी को करने का फैसला लिया है।’

बैठक में किसान नेताओं ने इन मुद्दों पर जताई नाराज़गी
1. सरकार से कहा- अफसरशाही से नहीं बनेगी बात 

आप जिद पर अड़े हैं। आप अपने-अपने सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी को लगा देंगे। वे कोई न कोई लॉजिक देते रहेंगे। हमारे पास भी लिस्ट है। फिर भी आपका फैसला है, क्योंकि आप सरकार हैं। लोगों की बात शायद कम सुनी जाती है। जिसके पास ताकत है, उसकी बात ज्यादा होती है। इतने दिनों से बार-बार इतनी चर्चा हो रही है। ऐसा लगता है कि इस बात को निपटाने का आपका मन नहीं है। तो वक्त क्यों बर्बाद करना? आप साफ-साफ जवाब लिखकर दे दीजिए, हम चले जाएंगे। – बलबीर सिंह राजेवाल, भारतीय किसान यूनियन के नेता

2. दोहराया कि कानून वापसी से कम मंज़ूर नहीं 
बैठक का माहौल गर्म था। हमने कह दिया है कि कानून वापसी के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। हम किसी कोर्ट में नहीं जाएंगे। कानून वापस लो, नहीं तो हमारी लड़ाई चलती रहेगी। लड़ेंगे, नहीं तो मरेंगे। योजना के मुताबिक, 26 जनवरी की परेड भी निकालेंगे। – हन्नान मुल्ला, ऑल इंडिया किसान सभा के जनरल सेक्रेटरी

तारीख पर तारीख चल रही है। बैठक में सभी किसान नेताओं ने एक आवाज में बिल रद्द करने की मांग की। हम चाहते हैं बिल वापस हो, लेकिन सरकार चाहती है कि संशोधन हो। सरकार ने हमारी बात नहीं मानी, तो हमने भी सरकार की बात नहीं मानी। – राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता

3. कानून वापसी, तभी घर वापसी
बैठक के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि कानूनों को वापस लेने की किसानों की मांग को एक बार फिर ठुकरा दिया। इस पर किसान नेताओं ने कहा, ‘हम राजनीतिक दल नहीं हैं। कानून वापसी करें, तभी घर वापसी होगी।’ हालांकि, कृषि मंत्री उन्हें समझाते रहे कि लोकतंत्र में हर समस्या का समाधान चर्चा से होता है।

मामला सुलझाने के लिए अब किसानों से ही विकल्प मांग रही सरकार
9वें दौर की बातचीत के बाद कृषि मंत्री मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा, ‘कानूनों पर चर्चा की कोशिश की गई, पर कोई फैसला नहीं हो पाया। हमने किसानों से कहा कि वे कानून वापसी के अलावा कोई विकल्प हमें दें तो हम विचार को तैयार हैं, लेकिन हमें कोई विकल्प नहीं दिया गया।’

सरकार अभी किसानों को और नाराज नहीं करना चाहती। कृषि मंत्री से पूछा गया कि क्या वे कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे किसान संगठनों को भी अगली बैठक में शामिल करेंगे? इस पर उन्होंने कहा, ‘अभी ऐसा कोई विचार नहीं है। अभी हम आंदोलन कर रहे पक्ष से बात कर रहे हैं। जरूरत पड़ी, तो दूसरे पक्ष पर विचार करेंगे।’

किसानों व सरकार के बीच इन मुद्दों पर है मतभेद 

  • 1. – सरकर कृषि कानूनों को वापस ले।
  • 2. सरकार यह लीगल गारंटी दे कि वह मिनिमम सपोर्ट प्राइस यानी MSP जारी रखेगी।
  • 3.  बिजली विधेयक वापस लिया जाएगा।
  • 4.  पराली जलाने पर सजा का प्रावधान वापस लिया जाए।
  • बिजली विधेयक और पराली के मुद्दे पर सरकार 7वें दौर की बातचीत में ही किसानों को भरोसा दे चुकी है, लेकिन MSP और कृषि कानूनों को वापस लेने की किसानों की मांग पर गतिरोध बना हुआ है।

क्या डेरा नानकसर निकालेंगे समझौते का कोई रास्ता 
डेरा नानकसर के मुखी बाबा लक्खा सिंह ने कृषि मंत्री तोमर से गुरुवार को एक मीडिएटर के तौर पर मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने बाबा लक्खा सिंह को बताया कि सरकार अब एक प्रस्ताव तैयार कर रही है, जिसमें राज्य सरकारों को कृषि कानून लागू करने या न करने की छूट दी जाएगी। डेरा नानकसर भी किसान आंदोलन में शामिल है।

बाबा लक्खा सिंह ने बताया, ‘करीब पौने दो घंटे हुई चर्चा में मैंने कृषि मंत्री से सवाल पूछा कि आप की बात किसी नतीजे पर खत्म नहीं होती तो क्या उन राज्यों को कानूनों से बाहर रख सकते हैं, जिनमें काफी विरोध है। इस पर तोमर ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर किसानों से बात करने को तैयार हैं। जो राज्य कानून को लागू करना चाहें, वे करें और जो नहीं चाहते वे नहीं करें।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *