तहलका पत्रिका के संस्थापक तरुण तेजपाल गोवा की एक अदालत से बलात्कार के आरोप में बरी

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पणजी: 

तहलका पत्रिका के संस्थापक तरुण तेजपाल को गोवा की एक अदालत ने बलात्कार के आरोप से बरी कर दिया है. जमानत पर बाहर चल रहे तेजपाल पर 2013 में गोवा के एक फाइव स्टार रिजॉर्ट में एक सम्मेलन के दौरान एक जूनियर सहयोगी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा था.

तेजपाल पर 2013 में गोवा के पणजी में एक फाइव स्टार रिजॉर्ट में एक कॉन्क्लेव् के उपरांत एक जूनियर सहयोगी ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. सहयोगी तेजपाल के दोस्त की बेटी थी. पीड़िता ने आरोप लगाया था कि लिफ्ट में तेजपाल ने उसके साथ दो बार यौन उत्पीड़न किया था.

  2017 में कोर्ट ने पूर्व जर्नलिस्ट पर रेप, यौन शोषण और गलत तरीके रोक लगाने के आरोप तय किए थे. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 342 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 354 (गरिमा भंग करने की मंशा से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना), 354-ए (यौन उत्पीड़न), धारा 376 की उपधारा दो (फ) (पद का दुरुपयोग कर अधीनस्थ महिला से बलात्कार) और 376 (2) (क) (नियंत्रण कर सकने की स्थिति वाले व्यक्ति द्वारा बलात्कार) के तहत मुकदमा चला.

तरुण तेजपाल 1980 के दौर से पत्रकारिता के पेशे से जुड़े रहे हैं. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, फाइनेंशियल एक्सप्रेस, आउटलुक जैसे मशहूर अखबारों और पत्रिकाओं में काम किया है. साल 2000 में उन्होंने तहलका वेबसाइट शुरू की थी. पंजाब यूनिवर्सिटी से इकॉनोमिक्स में स्नातक करने वाले तेजपाल मूलत: पंजाब के जालंधर के रहने वाले हैं.

तीन दशक से भी लंबा पत्रकारिता का लंबा अनुभव रखने वाले तेजपाल ने साल 2000 में नौकरी छोड़कर दूसरे वरिष्ठ पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर तहलका डॉट कॉम शुरू किया था. 2004 में तहलका टैब्लायड न्यूज पेपर और फिर 2007 में उसे एक मैग्जीन का रूप दे दिया गया.

तहलका ने शुरुआत में ही क्रिकेट में होने वाली मैच फिक्सिंग पर स्टिंग ऑपरेशन कर तहलका मचा दिया था. दूसरे स्टिंग ऑपरेशन में रक्षा सौदों में दलाली को उजागर किया था. भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण द्वारा रिश्वत काण्ड का स्टिंग भी इन्होने करवाया था।

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