पुलिस के रवैये व हनीट्रैप में फंसे सेक्टर-16 निवासी व्यक्ति ने क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन के बाहर किया आत्मदाह

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फरीदाबाद, 16 जून  ( धमीजा) : हनीट्रैप में फंसे व पुलिस के नकारात्मक रवैये से परेशान सेक्टर -16 निवासी लगभग 57  वर्षीय व्यक्ति  ने क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन के बाहर ज्वलनशील पदार्थ छिडक़कर खुद को आग लगा ली। अत्यधिक झुलसने के कारण शंकर नरूला नामक पीड़ित की मौके पर ही मौत हो गई। बुजुर्ग की पेंट की जेब में रखे कागजों से उसकी पहचान हुई। पुलिस ने परिजनों को सूचित किया। शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बादशाह खान अस्पताल भिजवाया है।

हनीट्रैप में फंसे सेक्टर – 16 में रहने वाले करीब 57 वर्षीय व्यक्ति ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आज बेहद दर्दनाक तरीके से आत्मदाह कर लिया।  बताया जा रहा है कि दिल्ली में रह रही एक महिला से इंस्टाग्राम पर शंकर नरूला की दोस्ती हुई थी। शुरू में उक्त महिल श्री नरूला से हज़ार -दो हज़ार या ऎसी ही छोटी रकम paytm / गूगल पे पर मंगवाती रही और फिर एक दिन उनसे मिलने का समय तय किया।  दिल्ली के एक आलीशान होटल में उनकी मुलाकात हुई। मुलाकात की हरकतों की वीडियो उक्त महिला ने बना ली और उसी दौरान एक महिला व् अन्य व्यक्ति वहां पहुँच गए और श्री नरूला को धमकाते हुए कहा कि वह महिला के परिजन हैं। श्री नरूला घबरा गए और इसी का फायदा उठते हुए उक्त महिला ने उनसे पैसे ऐंठने शुरू कर दिए। अब वह उनसे लाखों रूपये मांग रहे थे और श्री नरूला समझ चुके थे कि वह ब्लैकमेलिंग के जाल में फंस चुके हैं।  उन्होंने अपने बचाव के लिए फरीदाबाद पुलिस से दरकार लगाई , चर्चा है कि पुलिस ने   ब्लैकमेलरों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उसी के साथ सख्त रवैय्या अपनाया , जिससे परेशान होकर आज दिन में श्री नरूला ने सेक्टर –17 पुलिस क्राइम ब्रांच के निकट सड़क पर आत्मदाह कर लिया। सेक्टर -17 थाना पुलिस के प्रबंधक इंस्पेक्टर नरेश का कहना है कि उनके पास इस मामले की कोई शिकायत ही नहीं आयी थी।  उनकी जानकारी में है कि शिकायत क्राइम ब्रांच पुलिस को दी गयी थी कर उनके साथ किसी भी प्रकार की पुलिस सख्ती नहीं की गयी थी , उन्होंने होनेट्रेप से परेशान होकर आत्मदाह किया।  मामले की जांच पुलिस कर रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने पीड़ित के आत्मदाह के बाद कार्रवाई करते हुए देर सांय दिल्ली से चार युवतियों व एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।  शहर में इस बात की चर्चा हो चली है कि यदि समय रहते पुलिस ने ये कार्रवाई की होती तो पीड़ित व्यक्ति आत्मदाह ना करता और उसकी जान ना जाती।  लेकिन पुलिस के नकारात्मक रवैये के चलते पीड़ित को अपनी जान गंवानी पड़ीं।  इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं।  जब पीड़ित ने पुलिस को उन्हें ब्लैकमेल करने वालों के नाम व फोन नंबर तक लिखित शिकायत में दिए थे तो पुलिस ने इतने दिन तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।  क्या पीड़ित की मौत के लिए पुलिस भी जिम्मवार है ! 

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