अमरिंदर और सिद्धू के विवाद में आया नया मोड़, राहुल व प्रियंका से मिले गुरु, बोले- पूरी बात बता दी

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Chandigarh: पंजाब की कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार में खींचतान कम नहीं हाे रही। नवजोत सिंह सिद्धू ने विवादों के बीच कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से नई दिल्‍ली में मुलाकात की। सिद्धू ने इसकी तस्‍वीर ट्वीट की है। सिद्धू के अपना नया विभाग संभालने की जगह दिल्‍ली में राहुल व प्रियंका से मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में कयासबाजी शुरू हो गई है।

दूसरी ओर, सिद्धू के बाद एक और मंत्री के बागी सुर निकले हैं। शिक्षा विभाग से हटाए जाने के बाद कैबिनेट मंत्री ओपी सोनी ने बगावती तेवर दिखाए हैं। दूसरी ओर स्थानीय निकाय विभाग की जगह ऊर्जा विभाग मिलने के बाद से नवजोत सिंह सिद्धू कर चुप्‍पी से उनको लेकर संशय गहरा गया है। उनके ऊर्जा विभाग का कार्यभार संभालने को लेकर संदेह जताया जा रहा है।

अक्‍सर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहनेवाले सिद्धू ने 2 जून से साइलेंट मोड में रहने के बाद आज सुबह ट्वीट कर कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात के बारे में जानकारी देते हुए ट्वीट किया। दोनों नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान अहमद पटेल भी थे। सिद्धू ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अहमद पटेल के साथ अपना फोटो पोस्‍अ करते हुए ट्वीट किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष से मिला और अपना पत्र सौंपा। उनको सारी स्थिति से अवगत करा दिया है।

पूरे घटनाक्रम में सोमवार का दिन पंजाब की राजनीति खासकर कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मंत्रियों के विभाग बदलने के बाद सोमवार को पहला कामकाजी दिवस है। इस दिन मंत्री अपने नए विभागों का चार्ज संभालेंगे। ऐसे में सबकी नजर कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पर लगी हुई है कि वह आज ऊर्जा विभाग का कार्यभार संभालेंगे या नहीं। पिछले 20 दिनों से सिद्धू ने जो तेवर अपनाए हैं, उसे देखते हुए असमंजस है।

वैसे स्थानीय निकाय विभाग के मुकाबले ऊर्जा विभाग काफी बड़ा महकमा है। पंजाब में बिजली की दरों में लगातार वृद्धि हो रही है। इस विभाग में अपग्रेडेशन की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है। इसे देखते हुए सिद्धू के करीबी मान रहे हैं कि इस विभाग में काफी काम किया जाना है। स्थानीय निकाय केवल शहरी क्षेत्रों से जुड़ा हो, लेकिन बिजली महकमा शहर और गांव दोनों से जुड़ा हुआ है। हालांकि, पावरकॉम में ज्यादा पावर चेयरमैन के पास है। इसे देखते माना जा रहा है कि इस महकमे में सिद्धू के पास फैसले लेने का स्वतंत्र अधिकार नहीं होगा।

सोशल मीडिया खासका ट्विटर पर सक्रिय रहनेवाले सिद्धू 2 जून के बाद खामोश रहे। करीब सता दिनों बाद गुरू ने अपनी चुप्‍पी तोड़ी। अपने दिल की बात शायराना अंदाज में बयां करने वाले सिद्धू कुछ दिनों से ट्विटर पर भी सक्रिय नहीं थे, सोमवार को राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की तस्‍वीर सहित उन्‍होंने ट्वीट किया। लेकिन, इसके बावजूद नए विभाग को लेकर उन्होंने चुप्पी साध रखी है। वह मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं। बताया जाता है कि वह अपने करीबियों के सामने भी पत्ते नहीं खोल रहे।

उधर शिक्षा विभाग से हटाए गए कैबिनेट मंत्री ओपी सोनी के सुर भी बागी हो गए हैं। उन्‍होंने कहा कि पंजाब में ब्‍यूरोक्रेसी हावी है, लेकिन मैं झुकने वाला नहीं हूं। उन्होंने कहा कि कैप्टन साहब की अगुवाई में पार्टी अच्छा कर रही है। पंजाब में बहुत काम भी हो रहा है, लेकिन एक बात खुलकर जरूर कहूंगा कि पंजाब में ब्यूरोक्रेसी हावी है। लेकिन वह ब्यूरोक्रेसी के आगे झुकेंगे नहीं, क्योंकि वह झुकने वाले इंसान नहीं हैैं। सोनी ने कहा कि वह मेहनत करने वाले इंसान हैैं और न वह सुरेश कुमार के आगे झुकते हैैं और न ही नमस्ते करते हैैं। वह मंत्री हैैं और किसी भी हाल में ब्यूरोक्रेसी के आगे घुटने नहीं टेकेंगे।

अपना विभाग बदले जाने को लेकर पूछे गए सवाल के बाद उनकी पीड़ा सामने आ गई। उन्होंने कहा कि सीएम साहब की पाॅवर है। जिसे चाहे जहां भेज दें। हालांकि, उन्हें देखना चाहिए था कि काम हुआ या नहीं। खैर, सीएम साहब ने जो किया है, उसमें उनका (सोनी) भला ही होगा। शिक्षा मंत्री रहते हुए दिन-रात एक करके काम किया। उसी का परिणाम रहा कि इस साल सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणाम बेहद शानदार रहे।

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