हमेशा से सुर्ख़ियो में रहे‘ओरंगजेब नायक या खलनायक ‘ फिर चर्चा मे-लेखक हैं- अफ़सर अहमद

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2017

वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अफ़सर अहमद द्वारा लिखित ‘ओरंगजेब नायक या खलनायक ‘ बेहद रोचक तरीक़े से लिखित ऐतिहासिक पुस्तक है , जिसमें ओरंगजेब के जीवन के बारे में कई रोचक किससे प्रस्तुत किए गए हैं । लेखक ने पुस्तक में जानकारी देने से पूर्व ओरंगजेब के जीवन से सम्बंधित गहन अनुसंधान किया है ।

औरंगज़ेब: नायक या खलनायक

(बचपन से सत्ता संघर्ष तक)

पहला खंड

कुल पेज – 145

कैटेगिरी- हिस्ट्री, नोन फिक्शन

मूल्य- 250 रुपये- पेपरबैक

यह किताब क्यों-

औरंगजेब का किरदार दरअसल दशकों से भारतीय समाज में तीखी बहस का विषय बना हुआ है। औरंगजेब की नीतियों को लेकर गाहे-बगाहे सवाल उठते रहते हैं और उसके नायक या खलनायक होने की बहस बदस्तूर चलती रहती है। औरंगजेब को लेकर सवालों, आरोपों के अंधड़ के बीच यह साफ नहीं हो पाता कि हकीकत दरअसल है क्या।

6 खंडों की औरंगजेब की यह सीरीज वास्तव में उन आरोपों, सवालों की हकीकत जानने या ये कहें फैक्ट चैक करने की एक मजबूत कोशिश है। इसमें हर उस सवाल का जवाब है जो बीते कुछ सवालों में औरंगजेब को लेकर उठा है। बेशक, जवाब तलाशना आसान नहीं रहा क्योंकि बाद के इतिहासकारों में कुछ ही निष्पक्ष रह पाए। इसलिए पूरी सीरीज में अधिकतर औरंगजेब पर लिखे गए मूल संदर्भ ग्रंथों का सहारा लिया गया है।

इतिहास में पहली बार-

इससे पहले कभी भी औरंगजेब पर इतनी लंबी पड़ताल नहीं हुई। जदुनाथ सरकार ने औरंगजेब पर सर्वाधिक 5 खंड लिखे हैं। वह भी अंग्रेजी में लिखे गए हैं, हिंदी में अभी कोई भी प्रमाणिक पहल पहले नहीं हुई है।

पुरानी किताबों से अलग कैसे-

दरअसल यह इतिहास का एकेडमिक लेखन नहीं है। इन 6 खंडों में औरंगेजब की पूरी जिंदगी फैली हुई है। साथ में वो हर सवाल पिरोया गया है जो बार-बार बहस का हिस्सा बन जाता है। ऐसा पूर्व में कभी नहीं हुआ। यह एक तरह से हिस्ट्री का फैक्ट चैक है- मसलन क्या दारा शिकोह का सिर काटा गया? इस पर उस दौर के प्रमुख इतिहासकारों ने जो लिखा उसको एक साथ रखा गया है ताकि इस तथ्य की प्रमाणिकता निकल कर आ सके। ऐसे सभी सवालों का जवाब तलाशा गया है-

उदाहरण के लिए कुछ सवाल और जोड़ रहा हूं-

1- क्या वह संगीत से नफरत करता था? (पांचवां खंड)

2- उसने मंदिर क्यों तोड़े? मथुरा और काशी के मंदिर तोड़ने के पीछे की हकीकत क्या है? (पांचवां खंड)

3- क्या सचमुझ उसने अपने पिता और भाइयों के साथ धोखा किया? (दूसरा खंड)

4- क्या उसे हिंदुओं से नफरत थी? (पाचवां खंड)

5- शाहजहां और औरंगजेब के बीच पत्र व्यवहार का सच क्या है? (पहला व दूसरा खंड)

6- औरंगजेब की सेना में कितने हिंदू मनसबदार थे, थे भी या नहीं? (तीसरा खंड)

7- क्या उसने मंदिरों के लिए लैंड ग्रांट दी थीं? नेट पर घूम रहे इन फरमानों का सच क्या है? (पाचवां खंड)

8- औरंगजेब और वहाबिज्म का क्या नाता है? (पांचवां खंड)

9- औरंगजेब की लिखी कुरान की प्रतियां अभी कहां-कहां मौजूद हैं? (पहला खंड)

10- असली खलनायक कौन था दारा या औरंगजेब? (पहला और दूसरा खंड)

11- क्या उसके नाम से कुछ फरमान बाद में फर्जी तौर भी तैयार किए गए? (पांचवां खंड)

12- फरमान, निशान का क्या मतलब होता है? (पांचवां खंड)

13- कौन थी वो लड़की जिसे देखकर औरंगज़ेब बेहोश हो गया? (पहला खंड)

14- बल्ख में ऐसा क्या हुआ कि पूरा इस्लामिक जगत उसका लोहा मानने लगा? (पहला खंड)

संदर्भ-

इसमें संदर्भ का आधार उन लेखकों के काम को बनाया गया है जो उसके दौर में थे या फिर आज से करीब अस्सी साल पहले तक जो लिखा गया। इसका कारण है तथ्यों की विश्वसनीयता बनी रहे।

क्या है पहले खंड में-

पहला खंड दरअसल उसकी शुरुआती जिंदगी से जुड़ा है जिसमें उसकी व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़ी हैरतअंगेज जानकारियां हैं। जो इससे पहले कभी सामने नहीं आई। मसलन उसका संस्कृत भाषा ज्ञान, उसका एक लड़की को देखकर बेहोश हो जाना, उसकी हिंदू पत्नियां, उसके युद्ध के मैदान के किस्से और साथ ही औरंगज़ेब और उसके पिता शाहजहां के बीच सत्ता संघर्ष से पहले हुआ बेहद महत्वपूर्ण पत्र व्यवहार जो दोनों के बीच रिश्तों की हकीकत को सामने लाता है आदि। पहले खंड से यह साफ होता है कि मुग़लों में इतना भयंकर खूनी संघर्ष क्यों हुआ।

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