नाराज नेता संग कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कार्यालय में मचाया हंगामा

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New Delhi: लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस को मिली हार के बाद से कांग्रेस इससे उबर नहीं पा रही है। प्रदेश कमेटी में मनमुटाव की खबरें सुर्खियों में हैं। कांग्रेस के दो दिग्‍गज नेता पीसी चाको और शीला दीक्षित आमने सामने हैं। नतीजतन अब असंतोष कार्यकर्ता में भी बढ़ने लगा है। गुरुवार का हाल यह है कि प्रदेश काग्रेस का कार्यालय जंग का मैदान बन गया। पीसी चाको की चिट्ठी के बाद शीला दीक्षित ने भी अपनी तरफ से भी हारुन यूसुफ और देवेंद्र यादव के पर कतर दिए थे। नतीजतन आज सैकड़ों कार्यकर्ताओं सहित हारून यूसुफ प्रदेश कार्यालय पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। वहीं देवेंद्र यादव ने शीला के आदेश पर हाल में लगे ताले जबरन खुलवा दिए। इन नेताओं ने कहा कि हम केवल एआइसीसी के आदेशों को मानेंगे।

क्‍या है मामला
मंगलवार को प्रदेश प्रभारी ने तीनों कार्यकारी अध्यक्षों के अधिकार बढ़ाए तो बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित ने चाको समर्थक कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ और देवेंद्र यादव के पर कतर दिए। दरअसल, मंगलवार देर शाम चाको ने शीला को एक पत्र लिखकर कहा कि आपकी सेहत ठीक नहीं है जबकि विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने शेष बचे हैं। पार्टी गतिशील नहीं हो पा रही है। ऐसे में तीनों कार्यकारी अध्यक्षों को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए अधिकृत किया जा रहा है। वे तीनों अपने अपने नगर निगम क्षेत्र के अनुरूप जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की बैठक करेंगे और उसमें लिए गए निर्णयों से आपको भी अवगत कराएंगे। चाको ने तीनों कार्यकारी अध्यक्षों हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव और राजेश लिलोठिया को भी पत्र लिखकर इस आशय की जानकारी और अधिकार दे दिए।

चाको ने शीला को लिखे अपने पत्र में दो मुद्दे और भी उठाए। एक तो उनका कहना था कि शीला की ओर से न उन्हें उनके पत्रों का कोई जवाब दिया जा रहा है, न ही उनका फोन उठाया जा रहा है। दूसरी शिकायत उन्होंने यह रखी कि प्रदेश कांग्रेस के कुछ तथाकथित प्रवक्ता मीडिया के बीच एआइसीसी इंचार्ज के निर्णयों पर सवाल उठाते हुए गलत बयानबाजी कर रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

चाको के इस चौके पर बुधवार को शीला ने छक्का जड़ा। उन्होंने चाको समर्थक दोनों कार्यकारी अध्यक्षों हारून और देवेंद्र के ही पर कतर दिए। एक दिन पहले यानि 15 जुलाई को आदेश जारी करते हुए तीनों कार्यकारी अध्यक्षों के बीच कार्य विभाजन करते हुए शीला ने इन दोनों को केवल दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव और एनएसयूआइ तक सीमित कर दिया। जबकि लिलोठिया को उत्तरी एवं पूर्वी दिल्ली नगर निगम, युवक कांग्रेस एवं प्रदेश कांग्रेस के सभी प्रकोष्ठों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

करीब दो माह से देश का नया अध्यक्ष खोज रही कांग्रेस के लिए राजधानी भी परेशानी का सबब बन गई है। पार्टी की दिल्ली इकाई में अंतर्कलह बढ़ती जा रही है। अब तो हालात ऐसे हैं कि कार्यकर्ताओं के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं तक को दिल्ली की सत्ता दूर नजर आने लगी है। जानकारों के मुताबिक राहुल गांधी पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके हैं। नए अध्यक्ष की खोज लगातार जारी है। दूसरी ओर प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित भी इस्तीफा दे चुकी हैं, बावजूद इसके उनके स्तर पर नीतिगत फैसले लिए जा रहे हैं।

पहले तो मतभेद केवल शीला और चाको के बीच में ही थे, जबकि अब शीला और दो कार्यकारी अध्यक्षों हारून यूसुफ और देवेंद्र यादव के बीच भी बढ़ गए हैं। पार्टी पूरी तरह से दो गुटों में बंट गई है। वरिष्ठ नेताओं का एक गुट चाको के खिलाफ लामबंद हो गया है तो दूसरा शीला के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा चुका है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार पार्टी की यह अंतर्कलह दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान संभावित त्रिकोणीय मुकाबले की आस खत्म कर दे रही है।

आम आदमी पार्टी और भाजपा जहां पूर्णतया चुनावी मोड में आ चुकी हैं, एक दूसरे पर हमलावर भी हैं वहीं कांग्रेसी आपस में ही गुत्थमगुत्था हो रहे हैं। हालांकि कौन सही है और कौन गलत, यह तो विवाद का विषय है पर ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर तक के नेता फिलहाल हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। जिन्हें हटा दिया गया है, उन्हें अपने अस्तित्व की जानकारी नहीं और जिन्हें बनाया जा रहा है, उन्हें भविष्य की आशंका सता रही है। दूसरी तरफ चुनाव में अब छह माह का समय भी शेष नहीं बचा है। अगर अक्टूबर माह में हरियाणा के साथ ही चुनाव करा दिए गए तो पार्टी के लिए और बड़ा संकट पैदा होना तय है। वहीं अगले कुछ दिनों में प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के भाजपा में जाने की चचाएं भी जोर पकड़ रही हैं।

दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीसी चाको ने बताया क‍ि हारून यूसुफ और देवेंद्र यादव के कार्य विभाजन में बदलाव का कारण दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव की गंभीरता है। दोनों नेता छात्र राजनीति में अच्छी पकड़ रखते हैं और पार्टी के लिए छात्रसंघ चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसीलिए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।

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