सावधान : बढ़ रहा है प्रदूषण , ले सकता है आपकी जान

दिल्ली , 6 अक्टूबर ( दीप्ति ) : इन दिनों वायु प्रदूषण तेज़ी से बढ़ने लगा है। कार्बन की ज़हरीली चादर हवा में चढ़ने लगी है। बढ़ते प्रदूषण (Pollution) के कारण हमे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण हमें  सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन, कफ, खांसी और जुकाम जैसे सामान्य लक्षण नजर आते हैं। इसके अलावा कई लोगों को गंभीर बीमारियों का भी खतरा होता है जैसे फेफड़ों से जुड़ी समस्या या फिर अस्थमा।

अस्थमा

वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों में सबसे ज्यादा खतरा अस्थमा का होता है। इसके अलावा जो लोग पहले से ही अस्थमा से पीड़ित हैं, उनको इस जहरीली हवा में सांस लेना बेहद खतरनाक हो जाता है। प्रदूषित हवा के कारण सांस की नली में सूजन आ जाती है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

 निमोनिया
लेकिन क्या आप जानते हैं बढ़ते प्रदूषण से आपको निमोनिया (Pneumonia) का भी खतरा रहता है ,जो आपके लिए एक गंभीर समस्या है।
प्रदूषण के कारण आपके फेफड़ों में कई तरह के संक्रमण होते हैं उन्हीं में से एक निमोनिया भी हो सकता है। निमोनिया के दौरान आपके फेफड़ों में सूजन और कार्य में बाधा होती है। आज हम इस लेख में ये जानने की कोशिश करेंगे कि कैसे प्रदूषण के कारण आपको निमोनिया का  खतरा होता है और इससे कैसे बचाव किया जाए।

प्रदूषण और प्रदूषण के कारण होने वाले निमोनिया (Pneumonia) से मौत के आंकड़े को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तैयार कर सजग किया है । साल 2016 में डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट से पता चला कि इनडोर पॉल्यूशन और आउटडोर पॉल्यूशन के कारण भारत में 1 लाख बच्चों की मौत हो गई थी। इसमें निमोनिया को मृत्यु का एक बड़ा संक्रमण देखा गया था। आपको बता दें कि निमोनिया के कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं जिसमें सबसे बड़ा ये है कि ये स्थिति आपके या बच्चे के इम्यून सिस्टम को पूरी तरह से कमजोर बनाने पर काम कर रहा होता है।

ज़हरीली हवा के कारण बढ़ रही हैं स्वास्थ्य समस्याएं , ध्यान रखें आप भी हो सकते हैं इन समस्याओं के शिकार 

कैसे बढ़ता है प्रदूषण के दौरान निमोनिया का खतरा?

निमोनिया (Pneumonia) एक फेफड़ों से जुड़ा संक्रमण है जिसका समय पर इलाज न मिलने पर ये गंभीर हो सकता है। ये स्थिति आप बदलते मौसम के दौरान ज्यादा महसूस कर सकते हैं। वहीं, अगर हम ठंड के साथ बढ़ते प्रदूषण (Pollution) की स्थिति को देखें तो इस दौरान हवा शुष्क हो जाती है जिस कारण आपकी श्वांस नली में भी शुष्कपन आने लगता है, जिसके कारण आपकी फेफड़ों की कार्यों में बाधा आती है। हवा में रुखापन और शुष्क होने पर ये अपने साथ कई वायरस और संक्रमण को हमारे शरीर में लेकर पहुंचते हैं। ऐसे ही निमोनिया की तरह ब्रोंकाइटिस का भी खतरा होता है। इसलिए सर्दियों के दौरान ये जरूरी हो जाता है कि आप फेफड़ों को स्वस्थ रखें और बाहर जाने से खुद को कम से कम करें।

बचाव के तरीके :

  • बढ़ते प्रदूषण (Pollution) के दौरान मास्क हमेशा पहने रहें।
  • बार-बार गर्म पानी पिएं।
  • बच्चों और बुज़ुर्गों को बहुत ज्यादा बाहर जाने से रोकें।
  • कफ, जुकाम और खांसी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • रोजाना एक्सरसाइज करें, इससे आपके फेफड़े लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं।
  • अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्युनिटी ) को मजबूत बनाने पर जोर दें।

 

ठंड शुरू होने के साथ धीरे-धीरे प्रदूषण भी बढ़ने लगता है जिस कारण आप कई गंभीर स्थितियों का शिकार हो सकते हैं, ऐसे ही आपको इस दौरान निमोनिया का खतरा भी बढ़ने लगता है। जिसका आपको तुरंत इलाज कराना बहुत जरूरी होता है। इसलिए आप इसके लक्षण दिखने के साथ ही डॉक्टर से संपर्क करें।

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