राजस्थान में आरक्षण के लिए गुर्जरों का रेलवे ट्रैक पर कब्जा, बीच रास्ते में ही खड़ी रहीं कई ट्रेनें

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Rajasthan: राजस्थान में पांच फीसद आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर समाज ने शुक्रवार शाम को मलारना डूंगर में दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर कब्जा करने के साथ ही राजस्थान के विभिन्न जिलों में सड़कों पर जाम लगा दिया। सरकार ने भारी पुलिस बल तैनात करने के साथ ही गुर्जर बहुल इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। रेलवे पुलिस फोर्स भी पटरियों पर तैनात की गई है। गुर्जरों द्वारा रेलवे ट्रैक पर कब्जा करने के कारण एक दर्जन ट्रेनों को सवाईमाधोपुर, गंगापुर, कोटा, जयपुर, बयाना और भरतपुर रेलवे स्टेशनों पर रोक दिया।

कुछ ट्रेन बीच रास्ते में ही रोक दी गईं। आंदोलनकारियों ने कोठड़ी गेट के पास रेल की पटरी भी उखाड़ दी। अचानक ट्रेन रुकने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आंदोलन को लेकर फीड़बैक लिया, संभवत:गुर्जर नेताओं से बातचीत के लिए मंत्रियों और अधिकारियों की कमेटी बनाई जाएगी।

महापंचायत में आरक्षण मिलने तक रेले और सड़क यातायात रोकने का एलान
सवाई माधोपुर जिले के मलारना डूंगर में हुई गुर्जर समाज की महापंचायत में आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा कि गुर्जर सहित रायका,बंजारा,गाडिया लुहार और रेबारी जातियों को पांच फीसद आरक्षण देने को लेकर 20 दिन पहले अल्टीमेटम दिया गया था। सरकार से कहा गया था कि यदि आरक्षण देने की घोषणा नहीं की गई तो गुर्जर समाज सवाई माधोपुर में दिल्ली-मुम्बई रेलवे ट्रैक पर कब्जा करने के साथ ही प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर रेल और सड़क यातायात को बाधित करेगा।

सरकार की तरफ से आरक्षण को लेकर कोई पहल नहीं की गई,अब समाज के पास मलारना डूंगर रेलवे ट्रैक पर कब्जा करने के साथ ही प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर रेल और सड़क यातायात बाधित करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, किसी को भी परेशान नहीं किया जाएगा। महापंचायत समाप्त होने के बाद बैंसला की अगुवाई में गुर्जर समाज के लोगों ने रेलवे ट्रैक की तरफ कूच किया और करीब आधा घंटे में वहां पहुंचकर पटरी पर कब्जा कर लिया ।

भारी पुलिस बल तैनात
प्रशासन ने भी आंदोलन को देखते हुए भरतपुर, करौली, बूंदी, कोटा, सवाई माधोपुर, अजमेर, दौसा और टोंक जिलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। यूपी और एमपी से सुरक्षा बल को बुलवाया गया है। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रभावित इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने आठ जिलों में राजस्थान सशस्त्र बल की 17 कंपनियों की तैनाती की है। एक दर्जन राज्य पुलिस सेवा एवं राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया है। गुर्जर बहुल जिलों में तैनात रहे आइएएस और आइपीएस अधिकारियों को भी शांति व्यवस्था कायम रखने के साथ ही गुर्जर नेताओं के साथ बातचीत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह और खेल मंत्री अशोक चांदना के साथ ही आधा दर्जन विधायक गुर्जर नेताओं के संपर्क में है।

जानें, गुर्जर आंदोलन का इतिहास
आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर समाज पिछले 14 साल से आंदोलन करता रहा है। विभिन्न चरणों में हुआ आंदोलन कई बार हिंसक भी हुआ, जिसमें 73 लोगों की जान गई। आंदोलन के दौरान रेलवे और रोडवेज की संपत्ति को नुकसान होने के साथ ही आम लोगों को काफी परेशानी हुई थी। आरक्षण की सबसे पहले मांग साल 2006 में उठी थी, 2007 में आंदोलन काफी उग्र हुआ था। इस दौरान पुलिस की फायरिंग में 26 लोग मारे गए थे। इसके बाद 2008 में गुर्जर फिर सड़कों पर उतरे। इस दौरान पुलिस के साथ हुई झड़प में 38 लोग मारे गए। 2015 में फिर पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जरों ने रेलवे ट्रैक पर कब्जा कर लिया। इसके बाद भी कई बार छिट-पुट झड़पें होती रही, इनमें कुल 73 लोग मारे गए।

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