Wednesday, June 19, 2024
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हुड्डा गुट ने मारी बाज़ी ,उदयभान बने हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष , आया राम गया राम से रहा है गहरा रिश्ता

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फरीदाबाद , 27 अप्रैल ( धमीजा ) : हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के पद पर अब पूर्व विधायक उदयभान आसीन हो गए हैं। पार्टी हाईकमान ने कुमारी सैलजा का इस्तीफा मंजूर कर लिया और प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर उदयभान के नाम की घोषणा कर दी। 4 कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं। पूर्व सांसद श्रुति चौधरी, पूर्व विधायक राम किशन गुर्जर, जितेंद्र भारद्वाज और सुरेश गुप्ता को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उदयभान ने कहा कि जो संगठन में कमी आ रही है, उसे दूर किया जाएगा। पूरे हरियाणा में कांग्रेस सबको साथ लेकर चलेगी। 2024 की तैयारी है। पूर्व सीएम हुड्‌डा ने कहा कि हरियाणा में सरकार बनेगी और उदयभान के प्रधान बनने से पार्टी को मजबूती मिलेगी।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा अपने बेटे दीपेंद्र हुड्‌डा और पूर्व विधायक उदयभान के साथ सोनिया गांधी से मिलने दिल्ली पहुंचे थे। दीपेंद्र हुड्‌डा और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद दीपेंद्र ने कहा कि पार्टी संगठन को लेकर जो भी विचार थे, उन्हें हाईकमान के समक्ष रखा है। संगठन से जुड़े कई विषय पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखे।

 ‘आया गया राम से क्या रिश्ता रहा है उदयभान का ‘

भारत की राजनीति में चर्चित कहावत ‘आया राम गया राम’ से हरियाणा कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष उदयभान का गहरा रिश्ता है। यह मुहावरा उनके पिता गया लाल के एक ही दिन में तीन बार पार्टी बदलने पर चलन में आया था। वाकया 1967 में उस समय चर्चित हुआ, जब हसनपुर सुरक्षित सीट से निर्दलीय विधायक थे।

तत्कालीन नेता राव बीरेंद्र सिंह उन्हें चंडीगढ़ लेकर पहुंचे और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि गया राम अब आया राम है। इसके बाद भी उनके दल बदलने का सिलसिला जारी रहा। तब से यह दल-बदुलओं के लिए ‘आया राम, गया राम’ एक मुहावरा बन गया।

 ऐसे आरम्भ हुआ था आया राम गया राम का प्रचलन 

1967 में गया लाल ने हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। गया लाल ने बतौर आजाद उम्मीदवार करीब 360 वोटों से जीत दर्ज की। हरियाणा गठन के बाद हुए पहले ही चुनाव में गया लाल सहित 16 आजाद विधायक चुने गए थे, यह भी आज तक एक रिकॉर्ड है। उस समय कुल 81 विधानसभा क्षेत्र थे। 48 पर कांग्रेस को जीत मिली। भारतीय जनसंघ के 12 विधायक तो स्वतंत्र पार्टी के तीन विधायक चुने गए और रिपब्लिकन पार्टी को 2 सीटें मिली थी। 10 मार्च 1967 में भगवत दयाल शर्मा मुख्यमंत्री बन गए। कुछ समय बाद ही उनका सिंहासन डोलने लगा।

राव बीरेंद्र सिंह अंदरखाते कांग्रेस के विधायकों को तोड़ रहे थे। राव बीरेंद्र सिंह कांग्रेस से बागी होकर यूनाइटेड फ्रंट की अगुवाई कर रहे थे। गया लाल पहले कांग्रेस के साथ रहे। कुछ घंटे बाद वे यूनाइटेड फ्रंट में आ गए। फिर पाला बदलकर कांग्रेस और बाद में यूनाइटेड फ्रंट में आ गए। उन्होंने एक ही दिन में तीन बार दल-बदल किया। जब फिर से यूनाइटेड फ्रंट में आए तब राव बीरेंद्र सिंह ने चंडीगढ़ में गया लाल को मीडिया के सामने लाते हुए कहा कि गयाराम अब आयाराम हैं। इसके बाद हरियाणा में राष्ट्रपति शासन लगाकर 1968 में विधानसभा चुनाव हुए। और तभी से हरियाणा में आया राम ,गया राम मुहावरा प्रचलन में आया।

कुलदीप बिश्नोई भी थे दावेदार 

बता दें कि कुलदीप बिश्नोई ने भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद पर दावेदारी जताई थी। क्योंकि उनका कहना था कि यदि हुड्‌डा परिवार के पास दोनों पद चले गए तो बाकी गुट नाराज हो जाएंगे। पार्टी हाइकमान पूर्व मुख्यमंत्री हुड्‌डा को ही प्रदेशाध्यक्ष पद सौंपने के लिए तैयार हो गया था, परंतु भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के समक्ष नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ने की शर्त हाईकमान ने रखी थी।

 गुटबाज़ी के चलते सैलजा ने छोड़ा अध्यक्ष पद 

बता दें कि कुछ दिन पहले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की चर्चा चली थी। कुमारी सैलजा का पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के साथ मनमुटाव चल रहा है, जिस वजह से उन्होंने इस्तीफा देने की इच्छा जाहिर की है। सैलजा से पहले अशोक तंवर भी हुड्‌डा के साथ विवादों के चलते कांग्रेस छोड़ गए।

पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्‌डा नए अध्यक्ष का स्वागत करते हुए।