सूरजकुंड रोड स्थित खोरी गॉंव में माहौल गरमाया ,पुलिस तथा लोगों के बीच पथराव व लाठीचार्ज

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फरीदाबाद, 30 जून ( धमीजा): सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद अरावली क्षेत्र में बसी खोरी बस्ती में अतिक्रमण हटाने के मामले को लेकर आज पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया तो दूसरी और से पुलिस पर पथराव किया गया। इस दौरान वहाँ रहने वाली एक महिला बेहोश हो गयी। आज वहाँ किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने महापंचायत की और मांग रखी कि सरकार यहाँ रहने वाले लोगों के पुनर्वास का इंतज़ाम करे। खोरी गांव में दस हज़ार मकानों को तोड़ने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर मामला अब धीरे-धीरे तूल पकडऩे लगा है और  मामला गरमाने लगा है। आज बस्ती में होने वाली महापंचायत में एकत्रित भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने बल का प्रयोग किया तो गुस्साएं लोगों ने पथराव कर दिया। इस महापंचायत में किसान आन्दोलन की अगुआई करने वाले किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, जेएनयू के पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार, नर्मदा आन्दोलन की करता धर्ता  एवं सामाजिक कार्यकर्ता मेघा पाटकर के आने की सूचना थी, लेकिन केवल किसान सिंह चढूनी पहुंचे। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने खोरी बस्ती में रहने वालों की पुनर्वास की मांग की। इसी के साथ वह अपने किसान नेताओं के साथ धरने पर बैठ गए। वहीं इससे पूर्व खोरी के कुछ लोगों ने कल मंगलवार को जन्तर-मन्तर पर प्रदर्शन कर पुर्नवास की मांग को लेकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-फरीदाबाद की सीमा पर अरावली वन क्षेत्र की जमीन पर बसे गांव खोरी में हुए अवैध निर्माण हटाने के आदेश देते हुए छह सप्ताह का समय दिया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने कोर्ट के आदेशों को तामील करवाने के लिए खोरी क्षेत्र की बिजली, पानी सप्लाई बंद करवा दी। जिसके बाद खोरी बस्ती में रहने वाले कुछ लोग अपने मकान खाली कर सामान को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने में लगे हैं, लेकिन दशकों से रह रहे लोगों ने अभी तक अपना कब्जा नहीं छोड़ा है।
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने लाठीचार्ज की घटना की घोर निंदा की । चढूनी ने कहा कि पुलिस पर अगर पथराव किया गया है तो वो भी गलत है लेकिन पुलिस को भी उन पर लाठीचार्ज नहीं करना चाहिए था। पुलिस और लोगों में हुई आज की झड़प के बाद माना जा रहा है कि पुलिस प्रशासन अब यहां लोगों को ज्यादा वक्त देने के कतई मूड में नहीं है और तोडफोड़ की कार्यवाही को यहां कभी भी अंजाम दिया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सात जून 2021 को दिए आदेश में  छह सप्ताह के भीतर खोरी गांव को खाली कराने का आदेश दिया था । इसके बाद से यहाँ रहने वाले लोग परेशान हैं। उनका कहना है कि सरकार को विस्थापन के पूर्व पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। गांव में कई धार्मिक स्थल हैं जिनमे करीब 20 मंदिर, 10 मस्जिद, 4 चर्च व 1 गुरुद्वारा स्थापित हैं और यहां उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि राज्यों के कामगार रहते हैं।

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