Thursday, June 20, 2024
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जींद की उचाना विधानसभा सीट की लेकर भाजपा – जजपा में तकरार, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला वहाँ से एमएलए, बिप्लव देव ने भाजपा की प्रेमलता को घोषित किया अगला विधायक

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फतेहाबाद , 5 जून ( धमीजा ) : हरियाणा में जींद की उचाना विधानसभा सीट को लेकर भाजपा-जजपा गठबंधन में तकरार शुरू हो गई है। इस सीट से जजपा के दुष्यंत चौटाला विधायक एवं गठबंधन सरकार में डिप्टी सीएम हैं। भाजपा प्रदेश प्रभारी बिप्लव कुमार देव ने पिछला चुनाव हारी प्रेम लेता को भावी विधायक बता कर उनके चुनाव लड़ने पर मुहर लगा दी है।

इस पर जजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय चौटाला ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जजपा-भाजपा अगला चुनाव गठबंधन में लड़ने की बात कर रही हैं। उचाना सीट को लेकर शुरू हुए घमासान पर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। डा. अजय चौटाला ने कहा कि जिस सीट से प्रदेश के डिप्टी सीएम 40 हजार से ज्यादा वोट लेकर जीते हों, उस सीट पर भाजपाई कैसे क्लेम कर सकते हैं, यह समझ में नहीं आता। अजय ने पहली बार यह स्वीकार किया कि प्रदेश में जजपा की सरकार नहीं है, बल्कि जजपा सरकार में सहयोगी पार्टी है। पहलवानों के आंदोलन को लेकर भी वे परेशान दिखे।

अजय चौटाला आज फतेहाबाद में जेजेपी के कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। अजय चौटाला ने कहा कि भाजपा-जजपा अगला चुनाव इकट्ठा लड़ेंगे या नहीं यह निर्णय चुनाव के समय लिया जाएगा। अगर समझौते के तहत उचाना सीट उनके हिस्से आएगी तो वे लड़ लेंगे।

बुढ़ापा पेंशन 5100 रुपए न होने पर विपक्ष द्वारा जेजेपी पर साधे जा रहे निशानों पर अजय चौटाला ने कहा कि प्रदेश में सरकार हमारी नहीं है, हम सरकार के सहयोगी हैं और सहयोगी होने के नाते 2 बार में 500 रुपए पेंशन बढ़वा चुके हैं, लेकिन जो यह सवाल उठाते हैं, उन्होंने 10 साल में कितनी पेंशन बढ़ाई, जवाब दें। जब भी आगे मौका मिलेगा, पहली कलम से पेंशन 5100 रुपए कर दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि जजपा चौ.देवीलाल की नीतियों पर चलने वाली पार्टी है। चौ.देवीलाल ने जो वादे जनता से किए थे, उनको कानूनी रूप से अमलीजामा जेजेपी पहना रही है। 1977 व 87 में जो बातें उन्होंने की, वो पूरी की, जेजेपी के घोषणा पत्र के 70 प्रतिशत वादे पूरे कर दिए गए हैं, 30 प्रतिशत इसलिए पूरा नहीं कर पाए, क्योंकि हम सहयोगी दल हैं, छोटा दल वाले हैं। दिग्विजय के ठाठ वाले बयान पर भी उन्होंने यही सफाई दी कि यदि पूरी सरकार होती तो 5100 रुपए पेंशन होती और बुजुर्गों के ठाठ हो जाते।