सूरजकुंड अरावली क्षेत्र में दस हज़ार मकान तोड़ने का मामला गरमाया , लोगों ने किया रास्ता जाम , लोगों की नींद हराम , प्रशासन के लिए चुनौती

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फरीदाबाद, 11 जून ( धमीजा) : अरावली वन क्षेत्र के गांव खोरी व लकडपुर में दस हज़ार घरों को तोड़ने  का मामला गरमाने लगा है। इतनी बड़ी संख्या में मकान तोड़ना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती है , लेकिन प्रशासन व् राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करनी है और अदालत में जवाब दायर करना है। सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए सूरजकुंड अरावली क्षेत्र में बने दस हज़ार मकान तोड़ने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों के बाद जहां इस कॉलोनी में रहने वाले लोगों की नींद हराम हो गयी है वहीँ प्रशासन के भी पसीने छूट रहे हैं कि इतने बड़े स्तर पर तोड़फोड़ को अंजाम कैसे दिया जाए। सूरजकुंड अरावली क्षेत्र के लकड़पुर खोरी में अवैध रूप से बने मकानों में गरीब तबका रहता है। बड़े स्तर पर होने वाली इस तोड़फोड़ से जहां ज़िन्दगी भर की कमाई से घर बनाने वाले हज़ारों परिवार सड़क पर आ जायेंगे , वहीं प्रश्न उठ रहा है कि हज़ारों मकान एक दिन में तो बन नहीं गए।  ज़ाहिर सी बात है की नगर निगम फरीदाबाद , फारेस्ट विभाग , पुलिस , बिजली विभाग व  अन्य सरकारी विभाग के उन अधिकारियों की भी कोई ज़िम्मेदारी होनी चाहिए जिनके कार्यकाल में इतने बड़े स्तर पर निर्माण हुए। इतने मकान कोई रातों रात तो बन नहीं गए।  इन अवैध मकानों में बिजली और पानी के कनेक्शन लगे हुए है।  यही नहीं ज़यादातर लोगों के पास  इसी पते के आधार कार्ड भी हैं और बहुत से लोगों के तो वोटर कार्ड भी इसी एड्रेस के बने हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि इन अवैध मकानों के निर्माण में ही नहीं बल्कि इस पूरी बस्ती को बसाने में सरकारी अधिकारियों का भीपुरा हाथ रहा है।  अब जब सुप्रीम कोर्ट अरावली को बचाने के लिए सख्ती से संज्ञान ले रही है और दस हज़ार मकान तोड़ने का फैसला सुनाया है तो उन अधिकारीयों के खिलाफ भी संज्ञान लेना चाहिए , जो इसे बसाने के लिए ज़िम्मेवार हैं।
फिलहाल यहां रहने वाले लोगों के सामने संकट पैदा हो गया है की वह तोड़फोड़ के बाद कहाँ जाएंगे , वह प्रशासन से मांग कर रहे हैं की उन्हें वहाँ से हटाने से पहले उनके परिवारों के रहने की वैकल्पिक व्यव्स्था की जाए। इसी मांग व ज़िंदगी भर की कमाई से बने मकानों में तोडफोड़ के खिलाफ आज लोगों ने सूरजकुंड रोड पर जाम लगा दिया। लोगों ने तोडफोड़ की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर प्रदर्शन किया और अपनी नाराजगी जाहिर की। बाद में मौके पर मौजूद भारी पुलिस फोर्स ने जाम खुलवा दिया। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर जिला उपायुक्त से बात करने के लिए सेक्टर 12 स्थित लघु सचिवालय की ओर कूच कर गए। वहीं पुलिस ने कोविड नियमों का उल्लंघन करने व सडक़ जाम करने के आरोप में आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
इस प्रदर्शन में किसी प्रकार का बवाल ना हो, इसके लिए पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। प्रदर्शन के उपरान्त लोग उपायुक्त से मिलने उनके दफ्तर की ओर रवाना हो गए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से जहां इन दोनों कालोनियों के करीब 30 हजार लोगों के सिर से छत उजडऩे का खतरा है, वहीं प्रशासन ने अपने स्तर पर सभी तैयारियां आरंभ कर दी हैं। इसके लिए ड्रोन से हवाई सर्वे करवाया जाना है और पहले लोगों से अपील की जा रही है कि वह स्वयं ही अपने घर खाली करके चले जाएं। यदि इस पर भी लोग नहीं मानेंए तब वहां तोडफोड़ की जाएगी। वहीं लोगों की मांग है कि उन्हें वैकल्पिक निवास मुहैया करवाएं जाएं।

नगर निगम आयुक्त डॉ. गरिमा मित्तल ने खोरी गांव का दौरा किया। गांव में बने धार्मिक स्थल, स्कूल व बिजली की सप्लाई, पेयजल आपूर्ति की जानकारी ली। इसके साथ ही गांव में आने जाने के रास्ते और कितने घर कच्चे और कितने पक्के बने है। इसकी जानकारी जुटाई है। उन्होंने कहा कि गांव का सर्वे कार्य जारी है। इसी के तहत उन्होंने तोडफ़ोड़ से पहले गांव का दौरा किया है।

पुलिस प्रशासन ने माननीय सुप्रीमकोर्ट द्वारा खोरी गांव में अतिक्रमण को हटाने के आदेश के अनुपालन करवाने के लिए पूरी तैयारियां कर ली हैं। पुलिस उपायुक्त डॉ अंशु सिंगला ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस द्वारा खोरीवासियों को माननीय सुप्रीमकोर्ट द्वारा अतिक्रमण हटाने के आदेश के संदर्भ में मुनादी कर अपील की गई है कि वह माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का सम्मान करें। लोगों को बातचीत के जरिए समझाया जा रहा कि सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण के फलस्वरूप बनाए गए घरों को खाली कर दें। अतिक्रमण हटाते समय यदि किसी ने बाधा उत्पन्न की तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी।

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