Saturday, April 13, 2024
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एयर होस्टेस गीतिका आत्महत्या मामले में एमएलए गोपाल कांडा अदालत से बरी, पिछले माह शाह की रैली के इंतज़ामात में अहम रोल निभाया था कांडा ने

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फरीदाबाद , 25 जुलाई ( धमीजा ) : हरियाणा के पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा सुसाइड केस में बरी कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से 11 साल से राजनीतिक किनारे पर चल रहे सिरसा के विधायक गोपाल कांडा को जीवनदान मिल गया है। गीतिका विधायक कांडा की एयरलाइंस में एयर होस्टेस के तौर पर काम करती थी। उसने 23 साल की उम्र में 5 अगस्त, 2012 को दिल्ली के अशोक विहार स्थित अपने ही फ्लैट में सुसाइड किया था। गीतिका के परिवार वालों ने गोपाल पर गीतिका को परेशान करने का आरोप लगाया था और मौत का जिम्मेदार बताया था।

असल में गीतिका सुसाइड केस कांडा की सियासी रास्ते की सबसे बड़ी मुश्किल थी। इससे न केवल पहले उनकी मंत्री की कुर्सी गई बल्कि दूसरी बार मंत्री बनने की मंशा भी पूरी न हो सकी। यही नहीं, कुछ दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सिरसा आए तो उन्हें मंच पर जगह नहीं मिली। हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद कांडा का पॉलिटिकल करियर फिर रफ्तार पकड़ सकता है।

अब खुल कर सियासी पिच पर खेलेंगे कांडा 

हरियाणा के बहुचर्चित एयर होस्टेस गीतिका सुसाइड केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को विधायक गोपाल कांडा को बरी कर दिया। कांडा इस केस के मुख्य आरोपी थे। कांडा हरियाणा के गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं. बहुचर्चित गीतिका सुसाइड केस से बरी हुए एमएलए गोपाल कांडा अब खुलकर हरियाणा की सियासी पिच पर खेलेंगे। सबसे बड़ा सियासी असर सिरसा जिले में पड़ेगा। जहां से गोपाल कांडा सिटिंग एमएलए भी हैं। कांडा की सीएम मनोहर लाल खट्‌टर से अच्छी ट्यूनिंग मानी जाती है। ऐसे में चौटाला परिवार का किला ध्वस्त करने के लिए बीजेपी के लिए गोपाल कांडा तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं

घटना का सिलसिलेवार ब्यौरा .. कांडा ने क्या गंवाया

1. मंत्री पद खोना पड़ा था सुसाइड केस के बाद 
गीतिका ने 23 साल की उम्र में 5 अगस्त, 2012 को दिल्ली के अशोक विहार स्थित अपने ही फ्लैट में सुसाइड किया था। उस वक्त हरियाणा में कांग्रेस सरकार थी। भूपेंद्र हुड्‌डा सीएम थे। कांडा ने निर्दलियों के साथ मिलकर कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया था। बदले में उन्हें गृह राज्य मंत्री का पद मिला था । मगर, गीतिकासुसाइड केस में नाम आने के बाद कांडा को मंत्री पद छोड़ना पड़ा।। फिर 18 महीने तिहाड़ जेल में बिताने पड़े।

2. बीजेपी ने भी बना ली थी दूरी 
2019 में गोपाल कांडा दूसरी बार सिरसा से विधायक बने। निर्दलीय विधायक के तौर पर उन्होंने हरियाणा में भाजपा सरकार का समर्थन किया। सिरसा से सांसद सुनीता दुग्गल और निर्दलीय विधायक रणजीत चौटाला के साथ कांडा चार्टेड प्लेन से दिल्ली गए। उनकी फिर से मंत्री बनने की इच्छा थी। हालांकि तब मध्यप्रदेश की पूर्व सीएम उमा  भारती उनके खिलाफ मुखर होकर बोलने लगी। उमा भारती ने कांडा का समर्थन लेने पर अपनी पार्टी बीजेपी पर ही निशाने साधने शुरू कर दिए। तब मंत्री पद तो दूर, भाजपा ने उन्हें सरकार में शामिल नहीं किया। कांडा से सिर्फ बाहर से समर्थन लिया गया।

3. शाह की रैली के किये थे इंतज़ामात, लेकिन मंच पर रही नो एंट्री 
इसी साल जून महीने में लोकसभा चुनाव को लेकर सिरसा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली थी। रैली का सारा बंदोबस्त गोपाल कांडा और उनके भाजपा नेता भाई गोविंद कांडा ने किया था। शाह आए तो गोपाल कांडा उनके साथ जरूर दिखे। उनकी शाह के साथ गुरुद्वारा साहिब में बैठे की तस्वीर भी सामने आई। हालांकि रैली की स्टेज से गोपाल कांडा गायब थे। स्टेज पर गोपाल के भाई गोविंद कांडा और बेटे धवल कांडा को जगह दी गई। गोपाल कांडा मंच पर न जा सके तो रैली से वापस आ गए।

बरी होते ही सियासी गलियारों में चर्चाएं शुरू
गोपाल कांडा के बरी होते ही उनके मंत्री बनने को लेकर फिर सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गया है। अभी गोपाल कांडा भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। हालांकि NDA गठबंधन में कांडा की हलोपा शामिल है। चर्चा है कि अगर अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा कैबिनेट में विस्तार या फेरबदल हुआ तो कांडा को मौका मिल सकता है। भाजपा अगले चुनाव में कांडा की हलोपा से गठबंधन कर सकती है। इसकी बड़ी वजह सिरसा है, जहां कांडा भाजपा को मजबूती दिला सकते हैं।